श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 86: धृतराष्ट्रका भगवान‍् श्रीकृष्णकी अगवानी करके उन्हें भेंट देने एवं दु:शासनके महलमें ठहरानेका विचार प्रकट करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.86.17 
सस्त्रीपुरुषबालं च नगरं मधुसूदनम्।
उदीक्षतां महात्मानं भानुमन्तमिव प्रजा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जैसे लोग सूर्य भगवान को देखते हैं, वैसे ही यह सारा नगर, स्त्री, पुरुष और बालकों सहित महात्मा मधुसूदन को देखे।
 
Just as people see the Sun God, similarly this entire city including women, men and children should see the great soul Madhusudan. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)