श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 86: धृतराष्ट्रका भगवान‍् श्रीकृष्णकी अगवानी करके उन्हें भेंट देने एवं दु:शासनके महलमें ठहरानेका विचार प्रकट करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.86.14 
मम पुत्राश्च पौत्राश्च सर्वे दुर्योधनादृते।
प्रत्युद्यास्यन्ति दाशार्हं रथैर्मृष्टै: स्वलंकृता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन को छोड़कर मेरे सभी पुत्र और पौत्र वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित होकर स्वच्छ और सुंदर रथों पर बैठकर श्रीकृष्ण की अगवानी करने जाएंगे।
 
All my sons and grandsons, except Duryodhana, will go to receive Sri Krishna, adorned with clothes and ornaments, sitting in clean and beautiful chariots.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)