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mahabharat 5.86.12: मेरे पास खच्चरों से जुता जाने वाला एक रथ है जो एक दिन में चौदह योजन की यात्रा कर सकता है; वह भी मैं उसे अर्पित कर दूँगा॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.86: धृतराष्ट्रका भगवान‍् श्रीकृष्णकी अगवानी करके उन्हें भेंट देने एवं दु:शासनके महलमें ठहरानेका विचार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.86.12 
एकेनाभिपतत्यह्ना योजनानि चतुर्दश।
यानमश्वतरीयुक्तं दास्ये तस्मै तदप्यहम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मेरे पास खच्चरों से जुता जाने वाला एक रथ है जो एक दिन में चौदह योजन की यात्रा कर सकता है; वह भी मैं उसे अर्पित कर दूँगा॥12॥
 
I have a chariot drawn by mules which can travel fourteen yojanas in a day; that too I will offer to him.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)