श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.85.9 
तस्य पूजार्थमद्यैव संविधत्स्व परंतप।
सभा: पथि विधीयन्तां सर्वकामसमन्विता:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
परंतप! तुम आज से ही श्रीकृष्ण के स्वागत की तैयारी करो। मार्ग में अनेक विश्राम-स्थान बनवाओ और अपनी इच्छानुसार सब प्रकार की उपभोग-सामग्री का प्रबंध करो।
 
‘Parantap! You should prepare to welcome Shri Krishna from today itself. Build many resting places on the way and provide all kinds of consumer goods as per your choice. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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