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श्लोक 5.85.9  |
तस्य पूजार्थमद्यैव संविधत्स्व परंतप।
सभा: पथि विधीयन्तां सर्वकामसमन्विता:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| परंतप! तुम आज से ही श्रीकृष्ण के स्वागत की तैयारी करो। मार्ग में अनेक विश्राम-स्थान बनवाओ और अपनी इच्छानुसार सब प्रकार की उपभोग-सामग्री का प्रबंध करो। |
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| ‘Parantap! You should prepare to welcome Shri Krishna from today itself. Build many resting places on the way and provide all kinds of consumer goods as per your choice. 9॥ |
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