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mahabharat 5.85.8: यदि शत्रुओं का नाश करने वाले भगवान श्रीकृष्ण हमारे आतिथ्य से प्रसन्न हो जाएँ, तो हम सब राजाओं में से उनसे अपनी समस्त कामनाएँ प्राप्त कर लेंगे ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.85.8 
स चेत् तुष्यति दाशार्ह उपचारैररिंदम:।
कृष्णात् सर्वानभिप्रायान् प्राप्स्याम: सर्वराजसु॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि शत्रुओं का नाश करने वाले भगवान श्रीकृष्ण हमारे आतिथ्य से प्रसन्न हो जाएँ, तो हम सब राजाओं में से उनसे अपनी समस्त कामनाएँ प्राप्त कर लेंगे ॥8॥
 
If Lord Krishna, the destroyer of enemies, becomes pleased with our hospitality, then we, among all kings, will achieve all our desires from Him. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)