श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.85.7 
स मान्यतां नरश्रेष्ठ: स हि धर्म: सनातन:।
पूजितो हि सुखाय स्यादसुख: स्यादपूजित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यहाँ उन पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का आदर करना चाहिए; क्योंकि वे सनातन धर्म के स्वरूप हैं। यदि उनका आदर किया जाए, तो वे हमारे लिए सुख के स्रोत होंगे और यदि उनका आदर न किया जाए, तो वे हमारे दुःख का कारण बनेंगे॥ 7॥
 
‘That best of men, Shri Krishna, should be respected here; because he is the embodiment of eternal Dharma. If respected, he will be a source of happiness for us and if not respected, he will become the cause of our sorrow.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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