श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.85.6 
तस्मिन् हि यात्रा लोकस्य भूतानामीश्वरो हि स:।
तस्मिन् धृतिश्च वीर्यं च प्रज्ञा चौजश्च माधवे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सभी लोकों का जीवन उन्हीं पर निर्भर है, क्योंकि वे समस्त प्राणियों के स्वामी हैं। उन माधव में धैर्य, पराक्रम, बुद्धि और तेज सब कुछ विद्यमान है।॥6॥
 
‘The life of all the worlds depends on Him, because He is the Lord of all beings. That Madhava has everything - patience, valour, wisdom and brilliance.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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