श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  5.85.5 
उपायास्यति दाशार्ह: पाण्डवार्थे पराक्रमी।
स नो मान्यश्च पूज्यश्च सर्वथा मधुसूदन:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
बात यह है कि पाण्डव पक्ष की ओर से परम पराक्रमी भगवान श्रीकृष्ण यहाँ पधारेंगे। वे मधुसूदन हमारे लिए आदरणीय हैं और सब प्रकार से पूजनीय हैं।॥5॥
 
‘The thing is that from the Pandava side, the most valiant Lord Krishna will come here. That Madhusudan is respected by us and is worship-worthy in every way.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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