श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.85.16 
विशेषतश्च वासार्थं सभां ग्रामे वृकस्थले।
विदधे कौरवो राजा बहुरत्नां मनोरमाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
विशेषतः कुरुराज दुर्योधन ने वृकस्थल नामक ग्राम में अपने निवास के लिए जो विश्रामस्थान बनवाया था, वह अत्यंत सुन्दर और प्रचुर रत्नों से परिपूर्ण था ॥16॥
 
In particular, the resting place built by Kuru King Duryodhana for his stay in the village called Vrikasthal was very beautiful and was filled with abundant gems. ॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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