श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  5.85.14-15 
आसनानि विचित्राणि युतानि विविधैर्गुणै:।
स्त्रियो गन्धानलंकारान् सूक्ष्माणि वसनानि च॥ १४॥
गुणवन्त्यन्नपानानि भोज्यानि विविधानि च।
माल्यानि च सुगन्धीनि तानि राजा ददौ तत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजा दुर्योधन ने उन स्थानों में विचित्र आसन, स्त्रियाँ, सुगन्धित पदार्थ, आभूषण, सुन्दर वस्त्र, पौष्टिक भोजन और पेय, नाना प्रकार के भोजन और नाना प्रकार के गुणों वाले सुगन्धित पुष्पमालाएँ रख दीं ॥14-15॥
 
King Duryodhana placed in those places strange seats, women, fragrant substances, ornaments, fine clothes, nutritious food and drinks, various types of food and fragrant flower garlands, having various qualities. 14-15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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