श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.85.13 
ततो देशेषु देशेषु रमणीयेषु भागश:।
सर्वरत्नसमाकीर्णा: सभाश्चक्रुरनेकश:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब शिल्पियों ने नाना प्रकार के सुन्दर प्रदेशों में अनेक प्रकार के रत्नों से जड़ित अनेक विश्रामस्थान बनाए ॥13॥
 
Then the craftsmen made numerous resting-places in various beautiful regions, all studded with all kinds of gems. ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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