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श्लोक  5.85.10 
यथा प्रीतिर्महाबाहो त्वयि जायेत तस्य वै।
तथा कुरुष्व गान्धारे कथं वा भीष्म मन्यसे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु गांधारीनंदन! आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि श्रीकृष्ण के हृदय में आपके प्रति प्रेम उत्पन्न हो। अथवा भीष्मजी! इस विषय में आपकी क्या राय है? 10॥
 
‘Mighty armed Gandhari Nandan! You should make such efforts that love for you arises in the heart of Shri Krishna. Or Bhishmaji! What is your opinion on this matter?' 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)