Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.85.1-2: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! दूतों द्वारा भगवान मधुसूदन के आगमन का समाचार सुनकर धृतराष्ट्र बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने महाबली भीष्म, द्रोण, संजय और बुद्धिमान विदुर का यथोचित आदर करके मंत्रियों सहित दुर्योधन से इस प्रकार कहा - 1-2॥ | mahabharat अध्याय 5.85: दुर्योधनका धृतराष्ट्र आदिकी अनुमतिसे श्रीकृष्णके स्वागत-सत्कारके लिये मार्गमें विश्रामस्थान बनवाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
तथा दूतै: समाज्ञाय प्रयान्तं मधुसूदनम्।
धृतराष्ट्रोऽब्रवीद् भीष्ममर्चयित्वा महाभुजम्॥ १॥
द्रोणं च संजयं चैव विदुरं च महामतिम्।
दुर्योधनं सहामात्यं हृष्टरोमाब्रवीदिदम्॥ २॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! दूतों द्वारा भगवान मधुसूदन के आगमन का समाचार सुनकर धृतराष्ट्र बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने महाबली भीष्म, द्रोण, संजय और बुद्धिमान विदुर का यथोचित आदर करके मंत्रियों सहित दुर्योधन से इस प्रकार कहा - 1-2॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Dhritarashtra was thrilled after hearing the news of Lord Madhusudan's arrival through messengers. After giving due respect to the mighty Bhishma, Drona, Sanjaya and the wise Vidur, he said to Duryodhana along with his ministers thus - 1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥