श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.84.9 
प्रादुरासीन्महाञ्छब्द: खे शरीरमदृश्यत।
सर्वेषु राजन् देशेषु तदद्‍भुतमिवाभवत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तभी ज़ोर की आवाज़ हुई। आसमान में हर जगह इंसानों जैसी आकृतियाँ दिखाई देने लगीं। यह अजीबोगरीब चीज़ सभी देशों में देखी गई।
 
Maharaj! Then there was a loud noise. Human-like figures started appearing everywhere in the sky. This strange thing was seen in all the countries.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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