श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.84.8 
तम:संवृतमप्यासीत् सर्वं जगदिदं तथा।
न दिशो नादिशो राजन् प्रज्ञायन्ते स्म रेणुना॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! धूल के कारण सारा संसार अंधकार से ढक गया। कोई यह नहीं जान पा रहा था कि कौन सी दिशा ठीक है और कौन सी नहीं।
 
O King! The whole world became covered in darkness because of the dust. One could not know which direction was right and which was not right.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)