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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.84.6 
प्रत्यगूहुर्महानद्य: प्राङ्मुखा: सिन्धुसप्तमा:।
विपरीता दिश: सर्वा न प्राज्ञायत किंचन॥ ६॥
 
 
अनुवाद
सिंधु आदि बड़ी नदियों का प्रवाह, जो पूर्व की ओर बहता था, उलटकर पश्चिम की ओर मुड़ गया। सभी दिशाएँ विपरीत दिखाई देने लगीं। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।
 
The flow of big rivers like Sindhu etc. which used to flow towards the east reversed and turned towards the west. All directions started appearing opposite. Nothing could be understood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)