श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.84.4 
वैशम्पायन उवाच
तस्य प्रयाणे यान्यासन् निमित्तानि महात्मन:।
तानि मे शृणु सर्वाणि दैवान्यौत्पातिकानि च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले - 'हे राजन! महात्मा श्रीकृष्ण के जाते समय जो शकुन-अपशकुन हुए, वे सब मुझसे सुनिए।' ॥4॥
 
Vaishmpayana said, 'O King! Listen to me about the omens and bad omens that were a sign of disaster when Mahatma Sri Krishna was leaving.' ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)