जनमेजय उवाच
कथं प्रयातो दाशार्हो महात्मा मधुसूदन:।
कानि वा व्रजतस्तस्य निमित्तानि महौजस:॥ ३॥
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा, "दशर्कुलतिलक कुल के महापुरुष मधुसूदन ने किस प्रकार यात्रा की? जब महाबली कृष्ण जा रहे थे, तब कौन-कौन से शुभ-अशुभ शकुन हुए?"
Janamejaya asked, "How did the great soul Madhusudana of the Dasarhakulatilaka family travel? What good and bad omens appeared when the mighty Krishna was going?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥