श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.84.29 
सुमृष्टं भोजयित्वा च ब्राह्मणांस्तत्र केशव:।
भुक्त्वा च सह तै: सर्वैरवसत् तां क्षपां सुखम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद केशव ने ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन कराया, फिर स्वयं भी खाया और रात भर वहीं सबके साथ आराम से रहे।
 
Thereafter Keshav fed delicious food to the brahmins. Then he himself ate and stayed there with them all comfortably that night.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि श्रीकृष्णप्रयाणे चतुरशीतितमोऽध्याय:॥ ८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थानविषयक चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८४॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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