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श्लोक 5.84.24  |
तस्य तन्मतमाज्ञाय चक्रुरावसथं नरा:।
क्षणेन चान्नपानानि गुणवन्ति समार्जयन्॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| उसके सेवकों ने उसका अभिप्राय जानकर वहाँ डेरा डाल दिया और क्षण भर में ही उसे उत्तम भोजन और पेय पदार्थ भेंट कर दिए॥ 24॥ |
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| Knowing his intentions, his servants camped there. In a moment they presented him with the best of food and drink.॥ 24॥ |
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