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mahabharat 5.84.24: उसके सेवकों ने उसका अभिप्राय जानकर वहाँ डेरा डाल दिया और क्षण भर में ही उसे उत्तम भोजन और पेय पदार्थ भेंट कर दिए॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 5.84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.84.24 
तस्य तन्मतमाज्ञाय चक्रुरावसथं नरा:।
क्षणेन चान्नपानानि गुणवन्ति समार्जयन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उसके सेवकों ने उसका अभिप्राय जानकर वहाँ डेरा डाल दिया और क्षण भर में ही उसे उत्तम भोजन और पेय पदार्थ भेंट कर दिए॥ 24॥
 
Knowing his intentions, his servants camped there. In a moment they presented him with the best of food and drink.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)