श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.84.23 
अभ्यतीत्य तु तत् सर्वमुवाच मधुसूदन:।
युधिष्ठिरस्य कार्यार्थमिह वत्स्यामहे क्षपाम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
संध्यावंदन आदि सब क्रियाएँ समाप्त करके मधुसूदन श्रीकृष्ण बोले, "युधिष्ठिर का कार्य पूर्ण करने के लिए हम आज रात यहीं रहेंगे।" ॥23॥
 
After finishing all the activities including evening prayers, Madhusudana Sri Krishna said, "We will stay here tonight to accomplish Yudhishthira's task." ॥23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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