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mahabharat 5.84.19: भगवान श्रीकृष्ण को, जो प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी थे और अपने देश के पूजनीय अतिथि थे, अपने पास आते देख, उन्होंने उनके समीप जाकर विधिपूर्वक उनकी पूजा की।   |   mahabharat अध्याय 5.84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.84.19 
ते तु सर्वे समायान्तमग्निमिद्धमिव प्रभुम्।
अर्चयामासुरर्चार्हं देशातिथिमुपस्थितम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण को, जो प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी थे और अपने देश के पूजनीय अतिथि थे, अपने पास आते देख, उन्होंने उनके समीप जाकर विधिपूर्वक उनकी पूजा की।
 
Seeing Lord Krishna, who was as radiant as a blazing fire and was a revered guest of their country, approaching them, they went close and worshipped Him in the proper manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)