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mahabharat 5.84.16: मार्ग में उन्हें अनेक गाँव मिले जहाँ बहुत से पशु पाले गए थे। वे देखने में अत्यंत सुंदर और मन को तृप्ति देने वाले थे। उन सबको देखते हुए और अनेक नगरों और देशों को पार करते हुए वे आगे बढ़ते रहे॥16॥   |   mahabharat अध्याय 5.84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.84.16 
पश्यन् बहुपशून् ग्रामान् रम्यान् हृदयतोषणान्।
पुराणि च व्यतिक्रामन् राष्ट्राणि विविधानि च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में उन्हें अनेक गाँव मिले जहाँ बहुत से पशु पाले गए थे। वे देखने में अत्यंत सुंदर और मन को तृप्ति देने वाले थे। उन सबको देखते हुए और अनेक नगरों और देशों को पार करते हुए वे आगे बढ़ते रहे॥16॥
 
On the way, they came across many villages where many animals were reared. They were very beautiful to look at and gave satisfaction to the mind. Looking at all of them and crossing many cities and countries, they kept moving forward.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)