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mahabharat 5.84.15: हे भरतश्रेष्ठ! उस समय भगवान् अघन्नी चावल के सुन्दर खेतों को देखते हुए, जो धार्मिक कार्यों के लिए अत्यन्त उपयोगी थे और फसलों से भरपूर थे, अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक भ्रमण कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 5.84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.84.15 
स शालिभवनं रम्यं सर्वसस्यसमाचितम्।
सुखं परमधर्मिष्ठमभ्यगाद् भरतर्षभ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उस समय भगवान् अघन्नी चावल के सुन्दर खेतों को देखते हुए, जो धार्मिक कार्यों के लिए अत्यन्त उपयोगी थे और फसलों से भरपूर थे, अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक भ्रमण कर रहे थे।
 
O best of the Bharatas! At that time, the Lord was travelling very happily, looking at the beautiful fields of Aghanni rice, which were very useful for religious activities and were full of crops. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)