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mahabharat 5.84.14: मार्ग में बहुत सी स्त्रियाँ आती थीं और समस्त प्राणियों के कल्याण में तत्पर रहने वाले उन महात्मा श्री कृष्ण पर वन के सुगन्धित पुष्पों की वर्षा करती थीं॥14॥   |   mahabharat अध्याय 5.84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.84.14 
तं किरन्ति महात्मानं वन्यै: पुष्पै: सुगन्धिभि:।
स्त्रिय: पथि समागम्य सर्वभूतहिते रतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में बहुत सी स्त्रियाँ आती थीं और समस्त प्राणियों के कल्याण में तत्पर रहने वाले उन महात्मा श्री कृष्ण पर वन के सुगन्धित पुष्पों की वर्षा करती थीं॥14॥
 
Many women used to come on the way and shower fragrant flowers of the forest on that Mahatma Shri Krishna who was busy in the welfare of all the beings. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)