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mahabharat 5.84.13: हजारों ब्राह्मण जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करते थे और मधुपर्क के माध्यम से उनकी पूजा करते थे। धन-धान्य के दाता भगवान ने उन सभी को पर्याप्त धन भी दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.84.13 
संस्तुतो ब्राह्मणैर्गीर्भिस्तत्र तत्र सहस्रश:।
अर्च्यते मधुपर्कैश्च वसुभिश्च वसुप्रद:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हजारों ब्राह्मण जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करते थे और मधुपर्क के माध्यम से उनकी पूजा करते थे। धन-धान्य के दाता भगवान ने उन सभी को पर्याप्त धन भी दिया।
 
Thousands of Brahmins used to praise Lord Shri Krishna in various places and worshiped him through Madhupark. God, the giver of wealth, also gave sufficient wealth to all of them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)