श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.84.12 
ववर्ष पुष्पवर्षं च कमलानि च भूरिश:।
समश्च पन्था निर्दु:खो व्यपेतकुशकण्टक:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उन पर फूलों की वर्षा होगी और बहुत से कमल खिलेंगे, तथा सारा मार्ग काँटों और कंटकों से रहित हो जाएगा, तथा समतल हो जाएगा और दुःख-दर्द से रहित हो जाएगा ॥12॥
 
There would be a shower of flowers and many blooming lotuses on them, and the entire path would become free from thorns and thorns, and would become level and free from pain and suffering. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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