श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.84.11 
यत्र यत्र च वार्ष्णेयो वर्तते पथि भारत।
तत्र तत्र सुखो वायु: सर्वं चासीत् प्रदक्षिणम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भारतवर्ष वृष्णिनन्दन श्रीकृष्ण जहाँ-जहाँ रहते थे, वहाँ-वहाँ सुखद वायु बहती थी और समस्त शुभ शकुन उनके दाहिने भाग में प्रकट होते थे ॥11॥
 
India Wherever Vrishninandan Shri Krishna lived, pleasant winds used to blow and all the auspicious omens appeared on his right side. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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