Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.84.1-2: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! हे शत्रुओं को संताप देने वाले राजा! जब महाबाहु श्रीकृष्ण प्रस्थान कर रहे थे, तब उनके साथ दस सशस्त्र योद्धा, एक हजार पैदल सैनिक, एक हजार घुड़सवार, प्रचुर अन्न और सैकड़ों अन्य सेवक थे, जिन्होंने विरोधी योद्धाओं को जीत लिया था। ॥1-2॥ | mahabharat अध्याय 5.84: मार्गके शुभाशुभ शकुनोंका वर्णन तथा मार्गमें लोगोंद्वारा सत्कार पाते हुए श्रीकृष्णका वृकस्थल पहुँचकर वहाँ विश्राम करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
प्रयान्तं देवकीपुत्रं परवीररुजो दश।
महारथा महाबाहुमन्वयु: शस्त्रपाणय:॥ १॥
पदातीनां सहस्रं च सादिनां च परंतप।
भोज्यं च विपुलं राजन् प्रेष्याश्च शतशोऽपरे॥ २॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! हे शत्रुओं को संताप देने वाले राजा! जब महाबाहु श्रीकृष्ण प्रस्थान कर रहे थे, तब उनके साथ दस सशस्त्र योद्धा, एक हजार पैदल सैनिक, एक हजार घुड़सवार, प्रचुर अन्न और सैकड़ों अन्य सेवक थे, जिन्होंने विरोधी योद्धाओं को जीत लिया था। ॥1-2॥
Vaishmpayana says - O Janamejaya, O King who torments his enemies! When the mighty-armed Sri Krishna was setting out, ten armed warriors, a thousand foot soldiers, a thousand horsemen, abundant food supplies and hundreds of other servants accompanied him, who had conquered the opposing warriors. ॥1-2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥