महाबाहो! अब हम आपसे विदा लेकर जा रहे हैं, पुनः आपसे मिलेंगे। वीर! आपकी यात्रा निर्विघ्न हो। जब आप सभा में पहुँचकर दिव्य आसन पर बैठेंगे, उस समय हम आपके शरीर के अंगों को पुनः बल और तेज से परिपूर्ण देखेंगे।॥71-72॥
‘Mahabaho! Now we are taking leave after asking you, we will see you again. Brave! May your journey be without any obstacles. When you arrive in the assembly and sit on the divine seat, at that time we will see your body parts filled with strength and brilliance again.'॥ 71-72॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि श्रीकृष्णप्रस्थाने त्र्यशीतितमोऽध्याय:॥ ८३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णप्रस्थानविषयक तिरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८३॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७७ १/२ श्लोक हैं।]
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥