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mahabharat 5.83.66-69h: महामते केशव! जिन्होंने देवताओं और दानवों का प्राचीन युद्ध अपनी आँखों से देखा है, वे पुण्यात्मा देवर्षि, अनेक शास्त्रों के ज्ञाता ब्रह्मर्षि और आपका आदर करने वाले तपस्वी राजर्षि, सब दिशाओं से एकत्रित हुए संसार के क्षत्रियों को, सभा में बैठे हुए भूपालों को तथा सत्यस्वरूप भगवान जनार्दन को देखना चाहते हैं। इस परम मनोहर वस्तु को देखने के लिए ही हम हस्तिनापुर जा रहे हैं। शत्रुओं को संताप देने वाले माधव! वहाँ कौरवों आदि राजाओं की सभा में आप जो धर्म और अर्थ से युक्त वचन कहते हैं, उसे हम सुनना चाहते हैं। 66—68 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 66-69h
 
 
श्लोक  5.83.66-69h 
देवर्षय: पुण्यकृतो ब्राह्मणाश्च बहुश्रुता:।
राजर्षयश्च दाशार्ह मानयन्तस्तपस्विन:।
देवासुरस्य द्रष्टार: पुराणस्य महामते॥ ६६॥
समेतं पार्थिवं क्षत्रं दिदृक्षन्तश्च सर्वत:।
सभासदश्च राजानस्त्वां च सत्यं जनार्दनम्॥ ६७॥
एतन्महत् प्रेक्षणीयं द्रष्टुं गच्छाम केशव।
धर्मार्थसहिता वाच: श्रोतुमिच्छाम माधव॥ ६८॥
त्वयोच्यमाना: कुरुषु राजमध्ये परंतप।
 
 
अनुवाद
महामते केशव! जिन्होंने देवताओं और दानवों का प्राचीन युद्ध अपनी आँखों से देखा है, वे पुण्यात्मा देवर्षि, अनेक शास्त्रों के ज्ञाता ब्रह्मर्षि और आपका आदर करने वाले तपस्वी राजर्षि, सब दिशाओं से एकत्रित हुए संसार के क्षत्रियों को, सभा में बैठे हुए भूपालों को तथा सत्यस्वरूप भगवान जनार्दन को देखना चाहते हैं। इस परम मनोहर वस्तु को देखने के लिए ही हम हस्तिनापुर जा रहे हैं। शत्रुओं को संताप देने वाले माधव! वहाँ कौरवों आदि राजाओं की सभा में आप जो धर्म और अर्थ से युक्त वचन कहते हैं, उसे हम सुनना चाहते हैं। 66—68 1/2॥
 
Mahamate Keshav! Those who have seen the ancient battle between gods and demons with their own eyes, those virtuous devarshis, the learned Brahmarishis of many scriptures and the ascetic Rajarishis who respect you, want to see the Kshatriyas of the world gathered from all directions, the Bhupalas sitting in the assembly and you, Lord Janardan, who is the embodiment of truth. We are going to Hastinapur only to see this most beautiful thing. Madhav, the one who torments the enemies! We wish to hear what you say there, full of Dharma and Artha, in the gathering of Kauravas and other kings. 66—68 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)