श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 62-d1h
 
 
श्लोक  5.83.62-d1h 
कच्चिल्लोकेषु कुशलं कच्चिद् धर्म: स्वनुष्ठित:।
ब्राह्मणानां त्रयो वर्णा: कच्चित् तिष्ठन्ति शासने॥ ६२॥
(पितृदेवातिथिभ्यश्च कच्चित् पूजा स्वनिष्ठिता।)
 
 
अनुवाद
महात्माओं! क्या समस्त लोकों में सब कुशल है? क्या धर्म-कर्म ठीक से हो रहा है? क्या क्षत्रियों सहित तीनों वर्ण ब्राह्मणों के अधीन रहते हैं? क्या पितरों, देवताओं और अतिथियों का पूजन ठीक से हो रहा है?॥ 62॥
 
‘Mahatmas! Is everything well in all the worlds? Is the religious observance being done properly? Do the three castes, including the Kshatriyas, remain under the command of the Brahmins, right? Is the worship of ancestors, gods and guests being performed properly?’॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)