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mahabharat 5.83.61: तब भगवान श्रीकृष्ण तुरन्त ही रथ से उतरकर पूर्वोक्त रीति से खड़े हो गए, उन समस्त महर्षियों को प्रणाम किया, उन्हें प्रणाम किया और बोले -॥ 61॥   |   mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  5.83.61 
सोऽवतीर्य रथात् तूर्णमभिवाद्य जनार्दन:।
यथावृत्तानृषीन् सर्वानभ्यभाषत पूजयन्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान श्रीकृष्ण तुरन्त ही रथ से उतरकर पूर्वोक्त रीति से खड़े हो गए, उन समस्त महर्षियों को प्रणाम किया, उन्हें प्रणाम किया और बोले -॥ 61॥
 
Then Lord Krishna immediately alighted from the chariot, stood in the aforementioned manner, bowed to all those great sages, paid his respects to them and said -॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)