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mahabharat 5.83.59: दारुक द्वारा हांके जा रहे भगवान वासुदेव के घोड़े इतनी तेजी से चलने लगे कि ऐसा प्रतीत होने लगा मानो वे पूरी सड़क को पी जाएंगे और आकाश को निगल जाएंगे।   |   mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  5.83.59 
ते हया वासुदेवस्य दारुकेण प्रचोदिता:।
पन्थानमाचेमुरिव ग्रसमाना इवाम्बरम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
दारुक द्वारा हांके जा रहे भगवान वासुदेव के घोड़े इतनी तेजी से चलने लगे कि ऐसा प्रतीत होने लगा मानो वे पूरी सड़क को पी जाएंगे और आकाश को निगल जाएंगे।
 
Driven by Daruka, the horses of Lord Vasudeva began to move with such speed that it appeared as if they were drinking up the entire road and wanted to engulf the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)