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mahabharat 5.83.55: कुन्तीपुत्र भीमसेन काँपते हुए जोर से गर्जना करने लगे। अर्जुन के वचन सुनकर उनका हृदय अपार हर्ष और उत्साह से भर गया।   |   mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  5.83.55 
वेपमानश्च कौन्तेय: प्राक्रोशन्महतो रवान्।
धनंजयवच: श्रुत्वा हर्षोत्सिक्तमना भृशम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र भीमसेन काँपते हुए जोर से गर्जना करने लगे। अर्जुन के वचन सुनकर उनका हृदय अपार हर्ष और उत्साह से भर गया।
 
Shivering, Kunti's son Bhimsena started roaring loudly. Hearing Arjun's words, his heart was filled with immense joy and enthusiasm.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)