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वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! पाण्डुनन्दन अर्जुन के ऐसा कहने पर पाण्डव भीमसेन अत्यन्त प्रसन्न हुए । वे क्रोध के कारण बार-बार काँपने लगे ॥54॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Pandava Bhimsen was very happy when Pandunandan Arjun said this. He started shaking again and again due to anger. 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥