श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.83.51 
यदस्माकं विभो वृत्तं पुरा वै मन्त्रनिश्चये।
अर्धराज्यस्य गोविन्द विदितं सर्वराजसु॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! पहले जब हम लोगों ने गुप्त मंत्रणा की थी, तब हमने एक निश्चित निर्णय पर पहुँचकर केवल आधा राज्य लेकर संधि करने का निश्चय किया था; यह बात सब राजा जानते हैं॥ 51॥
 
Govind! Earlier when we had a secret consultation, we had arrived at a definite conclusion and decided to enter into a treaty by taking only half the kingdom; all the kings know this.॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)