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mahabharat 5.83.50: परंतु अर्जुन का पीछा करते हुए शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अपराजित श्रेष्ठ पुरुष अपने मित्र दाशार्ह कुलनन्दन श्रीकृष्ण से बोले- 50॥   |   mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.83.50 
व्रजन्नेव तु बीभत्सु: सखायं पुरुषर्षभम्।
अब्रवीत् परवीरघ्नं दाशार्हमपराजितम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
परंतु अर्जुन का पीछा करते हुए शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अपराजित श्रेष्ठ पुरुष अपने मित्र दाशार्ह कुलनन्दन श्रीकृष्ण से बोले- 50॥
 
But while following Arjun, he said to his friend Dasharha Kulanandan Shri Krishna, the undefeated best man who killed the enemy warriors - 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)