Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.83.45: हे आनर्तदेश के पूज्य योद्धा केशव! यह निश्चित नहीं है कि मनुष्य दुःख के भय से ही मरता है। अतः यदि वह जीवित भी हो, तो भी अपने पुत्रों की चिन्ता से अत्यन्त व्याकुल रहता होगा ॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.83.45 
न नूनं म्रियते दु:खै: सा चेज्जीवति केशव।
तथा पुत्रादिभिर्गाढमार्ता ह्यानर्तसत्कृत॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे आनर्तदेश के पूज्य योद्धा केशव! यह निश्चित नहीं है कि मनुष्य दुःख के भय से ही मरता है। अतः यदि वह जीवित भी हो, तो भी अपने पुत्रों की चिन्ता से अत्यन्त व्याकुल रहता होगा ॥ 45॥
 
O respected warrior of Anartadesh, Keshav! It is not certain that a man dies out of fear of suffering. Therefore, even if he is alive, he must be very distressed by the worry for his sons. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)