Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.83.42: हे शत्रुओं का नाश करने वाले! जब से यह ब्याहकर अपने ससुर के घर आई है, तब से इसने अनेक प्रकार के दुःख और कष्ट देखे और भोगे हैं, और अब भी वहाँ कष्ट भोग रही है ॥ 42॥ | mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऊढात् प्रभृति दु:खानि श्वशुराणामरिंदम।
निकारानतदर्हा च पश्यन्ती दु:खमश्नुते॥ ४२॥
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले! जब से यह ब्याहकर अपने ससुर के घर आई है, तब से इसने अनेक प्रकार के दुःख और कष्ट देखे और भोगे हैं, और अब भी वहाँ कष्ट भोग रही है ॥ 42॥
O destroyer of enemies! Ever since she got married and came to her father-in-law's house she has seen and experienced many kinds of sorrows and sufferings, and even now she is suffering there. ॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥