यो वै न कामान्न भयान्न लोभान्नार्थकारणात्।
अन्यायमनुवर्तेत स्थिरबुद्धिरलोलुप:॥ ३४॥
धर्मज्ञो धृतिमान् प्राज्ञ: सर्वभूतेषु केशव:।
ईश्वर: सर्वभूतानां देवदेव: सनातन:॥ ३५॥
अनुवाद
जो कामना, भय, लोभ या अन्य किसी भी उद्देश्य से कभी अन्याय का आचरण नहीं कर सकते, जिनकी बुद्धि स्थिर है, जो लोभरहित, धार्मिक, धैर्यवान, विद्वान् हैं और समस्त प्राणियों के भीतर निवास करते हैं, वे भगवान केशव समस्त देवताओं के भी देवता, सनातन परमेश्वर और समस्त प्राणियों के ईश्वर हैं ॥34-35॥
Who can never follow injustice due to desire, fear, greed or for any other purpose, whose intellect is stable, who is greed-free, religious, patient, learned and resides within all the beings, that Lord Keshav is the deity of all deities, the eternal Supreme Lord and the God of all living beings. 34-35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥