श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  5.83.27-28 
वसिष्ठो वामदेवश्च भूरिद्युम्नो गय: क्रथ:।
शुक्रनारदवाल्मीका मरुत्त: कुशिको भृगु:॥ २७॥
देवब्रह्मर्षयश्चैव कृष्णं यदुसुखावहम्।
प्रदक्षिणमवर्तन्त सहिता वासवानुजम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वसिष्ठ, वामदेव, भूरिद्युम्न, गय, क्रथ, शुक्र, नारद, वाल्मिकी, मरुत, कुशिक और भृगु आदि देवर्षि और ब्रह्मर्षि एकत्र हुए और यदुवंश को सुख देने वाले इंद्र के छोटे भाई श्रीकृष्ण की दक्षिणावर्त परिक्रमा करने लगे। 27-28॥
 
Vasistha, Vamdev, Bhuridyumna, Gaya, Krath, Shukra, Narada, Valmiki, Marut, Kushik and Bhrigu etc., the devarshis and Brahmarishis came together and circumambulated clockwise around Shri Krishna, the younger brother of Indra who gives happiness to the Yadu clan. 27-28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)