श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.83.26 
मन्त्राहुतिमहाहोमैर्हूयमानश्च पावक:।
प्रदक्षिणमुखो भूत्वा विधूम: समपद्यत॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मन्त्रों द्वारा दी गई आहुतियों सहित महान होमयाज्ञों द्वारा की गई आहुतियों को ग्रहण करके अग्निदेव दक्षिण-पश्चिम दिशा में उठती हुई ज्वालाओं सहित प्रज्वलित हो गए और धूमरहित हो गए ॥26॥
 
After receiving the offerings made by the great Homayajyas along with the oblations given by reciting mantras, Agnidev got ignited with the flames rising in the south-west direction and became smokeless. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)