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mahabharat 5.83.22: तत्पश्चात् सात्यकि को भी उसी रथ पर बिठाकर पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण रथ की ध्वनि से पृथ्वी और आकाश को गुंजायमान करते हुए वहाँ से चले गए॥22॥   |   mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.83.22 
तत: सात्यकिमारोप्य प्रययौ पुरुषोत्तम:।
पृथिवीं चान्तरिक्षं च रथघोषेण नादयन्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सात्यकि को भी उसी रथ पर बिठाकर पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण रथ की ध्वनि से पृथ्वी और आकाश को गुंजायमान करते हुए वहाँ से चले गए॥22॥
 
Thereafter, making Satyaki also sit on the same chariot, Purushottam Shri Krishna departed from there, making the earth and sky echo with the sound of the chariot. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)