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mahabharat 5.83.18: उसमें सभी आवश्यक वस्तुएँ सुन्दर रीति से रखी हुई थीं। उस पर एक बाघ की खाल का पर्दा लगा हुआ था। वह रथ शत्रुओं के लिए भयंकर था और उनकी प्रतिष्ठा को नष्ट कर रहा था। इससे यदुवंशियों का सुख भी बढ़ रहा था।   |   mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.83.18 
सूपस्करमनाधृष्यं वैयाघ्रपरिवारणम्।
यशोघ्नं प्रत्यमित्राणां यदूनां नन्दिवर्धनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उसमें सभी आवश्यक वस्तुएँ सुन्दर रीति से रखी हुई थीं। उस पर एक बाघ की खाल का पर्दा लगा हुआ था। वह रथ शत्रुओं के लिए भयंकर था और उनकी प्रतिष्ठा को नष्ट कर रहा था। इससे यदुवंशियों का सुख भी बढ़ रहा था।
 
All the necessary items were kept in it in a beautiful manner. A tiger skin covered it with a curtain. That chariot was fierce for the enemies and destroyed their good reputation. It also increased the happiness of the Yaduvanshis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)