Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.83.13: चाहे कोई कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, उसे अपने दुर्बल शत्रु की भी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए; (उससे सावधान रहना चाहिए।) इसके अतिरिक्त दुर्योधन, कर्ण और शकुनि भी दुष्टात्मा हैं। उनसे सावधान रहना बहुत आवश्यक है॥13॥ | mahabharat अध्याय 5.83: श्रीकृष्णका हस्तिनापुरको प्रस्थान, युधिष्ठिरका माता कुन्ती एवं कौरवोंके लिये संदेश तथा श्रीकृष्णको मार्गमें दिव्य महर्षियोंका दर्शन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्योधनश्च दुष्टात्मा कर्णश्च सहसौबल:।
न च शत्रुरवज्ञेयो दुर्बलोऽपि बलीयसा॥ १३॥
अनुवाद
चाहे कोई कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, उसे अपने दुर्बल शत्रु की भी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए; (उससे सावधान रहना चाहिए।) इसके अतिरिक्त दुर्योधन, कर्ण और शकुनि भी दुष्टात्मा हैं। उनसे सावधान रहना बहुत आवश्यक है॥13॥
No matter how powerful someone is, he should not ignore even his weak enemy; (one should be cautious of him.) Moreover, Duryodhan, Karna and Shakuni are evil souls. It is very important to be cautious of them.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥