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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना
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श्लोक 9
श्लोक
5.82.9
न चापि ह्यकरोद् वाक्यं श्रुत्वा कृष्ण सुयोधन:।
युधिष्ठिरस्य दाशार्ह श्रीमत: संधिमिच्छत:॥ ९॥
अनुवाद
युद्धविराम चाहने वाले युधिष्ठिर के ये (विनम्र) वचन सुनकर भी दुर्योधन ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
Even after hearing these (humble) words of Yudhishthira, who desired a truce, Duryodhan did not accept them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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