श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  5.82.7-8 
पञ्च नस्तात दीयन्तां ग्रामा इति महाद्युते।
अविस्थलं वृकस्थलं माकन्दीं वारणावतम्॥ ७॥
अवसानं महाबाहो कञ्चिदेकं च पञ्चमम्।
इति दुर्योधनो वाच्य: सुहृदश्चास्य केशव॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली केशव! (उन्होंने संजय से ऐसा कहा था -) संजय! तुम दुर्योधन और उसके मित्रों के समक्ष मेरी यह माँग रखो - 'पिताजी! आप हमें ये पाँच गाँव दीजिए - अविस्टल, वृकस्थल, माकन्दी, वारणावत और अन्तिम पाँचवाँ गाँव।'
 
O mighty Keshav! (He had said this to Sanjaya -) Sanjaya! You place this demand of mine before Duryodhan and his friends - 'Father! You give us these five villages - Avisthal, Vrikasthal, Makandi, Varanavat and the last fifth one.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)