श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.82.45 
एवं ता भीरु रोत्स्यन्ति निहतज्ञातिबान्धवा:।
हतमित्रा हतबला येषां क्रुद्धासि भामिनि॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
‘भामिनी! जिन विरोधियों पर तुम क्रोधित हो, उनकी स्त्रियाँ भी अपने बन्धु-बान्धवों, मित्रों और सेनाओं के मारे जाने पर इसी प्रकार रोएँगी।
 
‘Bhamini! The women of those opponents on whom you are angry will also cry in the same way when their relatives, relatives, friends and armies are killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)