श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 82: द्रौपदीका श्रीकृष्णसे अपना दु:ख सुनाना और श्रीकृष्णका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.82.44 
तामुवाच महाबाहु: केशव: परिसान्त्वयन्।
अचिराद् द्रक्ष्यसे कृष्णे रुदतीर्भरतस्त्रिय:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तब महाबाहु केशव ने उसे सान्त्वना देते हुए कहा - 'कृष्णे! तुम शीघ्र ही भरतवंश की अन्य स्त्रियों को भी इसी प्रकार रोते हुए देखोगे ॥44॥
 
Then the mighty-armed Keshav consoled him and said – 'Krishne! You will soon see other women of Bharatvansh also crying in the same way. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)